हनुमान पूजा स्तोत्र - Hanuman Worship Prayers


हनुमान जी की पूजा करते वक्त इन सभी स्तोत्रों का पठन कर सकते हैं ! 


श्री आँजनेयम , प्रसन्न आंजनेयम ,    

प्रभा दिव्य कायम , प्रकीर्ति प्रदायम ,

भजे वायुपुत्रम , भजे वालगात्रं ,

भजेहम पवित्रम, भजे सूर्यमित्राम ,

भजे रूद्र रूपम , भजे ब्रह्म तेजाम || 


ॐ नमो श्री आञ्जनेय स्वामिने नमः || (१)

तात्पर्य :- 

हे आञ्जनेय ! आप प्रसन्न हों | प्रकाश से जगमगाते हुए, यश प्रदान करें | 
हे वायु देवता के पुत्र , लम्बे गर्दन वाले , पवित्र मन वाले, हे सूर्य भगवान के मित्र , भयंकर रूप धारण करने वाले , ब्रह्मा जी के तेज़ वाले , आप को मैं नमन करता हूँ | 


आञ्जनेयम , अति पाटल आननं ,
कांचनाद्रि कमनीय विग्रहाम 
पारिजात तरु मूल वासिनम 
भावयामि पवमान नन्दनम || (२)

तात्पर्य :-

हे आञ्जनेय ! (अंजनी के पुत्र), उज्जवल चमकते हुए मुख मंडल वाले ! सोने की पहाड़ जैसी शोभनीय बदन के स्वामी ! पारिजात के नीचे रहने वाले वायु पुत्र ! आप ही के ध्यान करता हूँ !


मनोजवं मारुत तुल्य बेगम , जितेन्द्रियम , बुद्धिमतां वरिष्ठम | 

वातात्मजं , वानर यूध मुख्यम , श्रीराम दूतं , शिरसा नमामि || (३)

तात्पर्य :-

मन के बराबर तीव्रता तथा वायु के बराबर तेज़ से चलने वाले , इन्द्रियों को जीत कर , बुद्धि में श्रेष्ट वाले , हे वायु के पुत्र , वानर योद्धाओं में प्रथम , श्री राम जी के दूत , मैं आप के आगे नत मस्तक हूँ ( शिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ ) 


अतुलित बलधामम , स्वर्ण शैलाभ देहम 
दनुज वन कृशाणुम , ज्ञानिनाम अग्रगण्यम | 
सकल गुण निधानाम , वानराणा मधीशम 
रघुपति प्रिय भक्तं , वातजातम नमामि || (४) 

तात्पर्य :-

हे हनूमान ! आप का बल असीमित है , देह आप का सोना जैसा प्रकाशमान है , असुरों के झुण्ड आप के सामने घास के तिनके जैसे हैं , ज्ञानियों में आप अव्वल माने जाते हैं , सभी गुणों के आप आश्रय हैं (ख़जाने जैसे हैं ) , वानरों के अधिपति हैं , हे श्री राम के भक्त , वायु पुत्र , आप को अंजलि समर्पित करता हूँ !


गोष्पदी कृत वाराशिम , माशकी कृत राक्षसं 
रामायण महामाला रत्नम , वन्दे अनिलात्मजं | 
यात्र यत्र रघुनाथ कीर्तनम , तत्र तत्र कृत मस्तकांजलिम 
भाष्ण वारि परिपूर्ण लोचनम , मारुतिम , नमत राक्षतान्तकम || (५ )

तात्पर्य :-

मैं उन हनुमान जी को नमन करता हूँ जिन्होंने समुन्दर को एक गाय के पैर से बने गड्ढ़े के बराबर लाँघ लिए , तथा राक्षसों को मच्छर के बराबर कुचल दिए | हे हनुमान!आप रामायण माला के रत्न हैं | जहाँ जहाँ श्री राम के कीर्तन हों तहाँ तहाँ मस्तक झुका कर , आँखों में हर्षोल्लास के पानी भरे हुए , अंजलि घटाने वाले हे हनुमान ! राक्षसों के विनाशक ! आप को नमन करता हूँ | 


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