पूजा विधि - घर में पूजा करने के सरल उपाय - Daily Worship at Home Tips

 


प्रति दिन घर पर पूजा करने के कुछ सरल व आसानी तरीके मैं यहाँ प्रस्तुत करना चाहूंगा | 

मैं एक वैष्णव ब्राह्मण हूँ तथा कई साल से अपने घर पर रोज़ प्रातः काल पूजा करता आ रहा हूँ | तो पूजा करते करते मुझे आदत हो गया तथा कभी कभी समय के अभाव में कुछ आसानी तरीकें ढूंढना पड़ता था | इस तरह एक क्लुप्त समय के अन्दर पूजा करने का विधि निकाल सका | अब आपसे उस तरीके को बाँटता हूँ |  

मेरे सुझाव को आप अपने रीति रिवाज़ के अनुसार तथा समय के अनुसार ढल सकते हैं | 

पूजा सामग्री 

आप इतना तो जानते ही होंगे कि पूजा करने के लिए एक घर के अंदर एकान्त तथा परिशुद्ध वातावरण बनाना चाहिए | भगवान की मूर्ती अथवा तस्वीर रखना चाहिए | और जरूरतों को मैं बता रहा हूँ | 
  • पानी के लिए दो या एक छोटा सा जल पात्र | एक भगवान के निमित्त तथा एक अपना आचमन वग़ैरह के वास्ते | ताम्बा या पञ्च लोहा पात्र बेहतर माना जाता है | स्टील वाला भी ठीक ही है | 
  • एक गहरा प्लेट जिस में पानी को डाला जाता है | यह पात्र भी उसी लोहे का रख लीजिएगा | 
  • एक या दो दिए जलाने वास्ते दिया दान | ये पीतल के हों तो बेहतर है अथवा स्टील, चाँदी के भी हो सकते हैं | 
  • दिया जलाने  के लिए तेल, रुई की बत्ती, तथा दियासलाई | 
  • भगवान को एक मन्दिर में या अलमारी में अथवा जमीन पर कुछ बिछाके भी रख सकते हैं | 
  • पूजा-पाठ के किताब हों तो सुविधा होगा | न हो तो इंटरनेट से सेव करके रख सकते हैं | 
  • पूजा के इस्तेमाल के लिए अगरबत्ती, कपूर | 
  • भगवान के भोग के लिए फल, गुड़ | मैं दो केला या थोड़ा गुड़ चढ़ाता हूँ | 
  • प्रसाद के लिए एक स्टील प्लेट |  

पूजा विधान 

  • दिया जलाकर भगवान को नमस्कार करें | 
  • मैं पहले माता पिता को तथा अपने बचपन के गुरुओंको मन में प्रणाम कर तब पूजा आरम्भ करता हूँ | 
  • भगवान की पूजा के लिए रखेगए बर्तन में पानी भर कर उसे अपनी दाहिने हथेली से ढक कर  पवित्र करने वाला मंत्र उच्चारण करें | " गंगे च यमुने चैव गोदावरी , सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी जलेस्मिन सन्निधिम कुरु || ". 
  • अब उस पानी को अपने दाहिने अंघूठे से सिर पर तीन बार छिड़क लीजिए | 
  •  एक नया स्पून पूजा के लिए ऱख लीजियेगा | उस स्पून से उपरोक्त बर्तन में से पानी निकाल कर भगवान को अर्घ्य के वास्ते उनके दाहिनी हाथ को दिखा कर पानी पूजा प्लेट में डाल दीजिए | 
  • फिर से स्पून में पानी निकाल कर पाद्य समर्पित करते हुए भगवान के पैर को छुवा कर थाली में डाल दीजिए |
  • अब फिर पानी निकाल कर भगवान के नहाने के वास्ते उनके चारों ओर घुमा कर थाली में डाल दीजिए |  
  • अर्घ्य, पाद्य, स्नान के बाद भगवान को आचमन समर्पण करना है | आचमन तीन बार दिया जाता है | अतः चम्मच से तीन बार पानी लेकर भगवान के मुँह की ओर दिखाते हुए थाली में डाल दीजिए |\
  • अब नमस्कार कर के स्तोत्र पाठ करना है | आप के जानकारी तथा सुविधा के अनुसार ३,४ स्तोत्र पठन करें | 
  • अगर अर्चना भी करना चाहें तो भगवान का १०८ नाम पठन करते हुए पुष्प, कुम्कुम से पूजा कर सकते हैं | 
  • स्तोत्र पारायण के पश्चात धूप जलाकर दिखाना है | दो अगरबत्ती जला कर उस धुप भगवान के चारों ओर घुमा दीजिए | 
  • अब दीप दर्शन कराना है | दीप की ज्वाला को अपनी हथेली से भगवान की ओर तीन बार दिखा दीजिए | 
  • नैवेद्यम समर्पण करना है | फल और गुड़ भगवान के मुख की ओर दिखाते हुए जैसे बच्चे को खिलाते हैं उस तरह प्यार से खिला दीजिए | 
  • खिलाने के बाद हाथ, पैर धोना है | चम्मच से पानी लेकर हाथ और मुख की और दिखा कर थाली में डालिए | 
  • अब फिर से आचमन यानि पानी पिलाना है | चम्मच से तीन बार पानी लेते हुए भगवान को पिलाते हुए थाली में डाल दीजिए | 
  • मङ्गल आरती के लिए या तो कपूर जला कर कर सकते हैं या दीप से ही आरती दे सकते हैं | आरती गाना हो तो गा लीजिए या केवल डीप को को भगवान के चारों ओर तीन बार घुमा दीजिए | 
  • अब पूजा सामप्त हो गया है | नमन कर के प्रसाद ग्रहण करें |\ 

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