लक्ष्मी पूजा स्तोत्र - Lakshmi Worship Hymns (Hindi Meanings)
लक्ष्मी देवी भाग्य , सौभाग्य तथा मुक्ति प्रदायिनी माता हैं | प्रति दिन इनकी पूजा करने से आपके परिवार में सुखः,समृद्धी , तथा आरोग्य बना रहेगा |
लक्ष्मी पूजा स्तोत्र प्रतिदिन पूजा के समय पहले आचार्य वन्दन तथा गणेश वंदन के बाद पढ़ा जा सकता है | ये निम्न दिए जाने वाले तीनों श्लोक/स्तोत्र बहुत ही आसानी से उच्चारण कर सकते हैं |
स्तोत्र के साथ उनका भाव भी प्रत्येक के नीचे दिया जा रहा है |
लक्ष्मी स्तोत्र
लक्ष्मीम क्षीर समुद्र राज तनयाम श्रीरंग धामेश्वरीम
दासीभूत समस्त देव वनिताम लोकैक दीपांकुरीम |
श्रीमन मंद कटाक्ष लभ्द विभव ब्रहमेन्द्र गंगाधराम
त्वाम त्रैलोक्य कुटुम्बिनीम सरसिजाम वन्दे मुकुन्द प्रियाम || (१)
तात्पर्य :-
माता लक्ष्मी जी ! क्षीरसागर की पुत्री , श्रीरंग धाम पर बसने वाली , अनेक परिचारिका ओम तथा अन्य प्राणी से सेवा पाने वाली , समस्त लोक के एक ही मात्र दिव्य ज्योती माने जाने वाली माँ ! श्रीमन विष्णु, ब्रह्मा, शिव के प्रसन्न कटाक्ष के ऐश्वर्य से आप तीनों लोक वास करती हैं ! हे सरोवर में जन्मी , मुकुन्द के लाड़ली माता ! आप को प्रणाम |\
मातर नमामि , कमले , कमलायताक्षी
श्रीविष्णु हृतकमल वासिनी विश्वमाता
क्षीरोदजे कमल कोमल गर्भ गौरी
लक्ष्मी प्रसीद सततम नमताम शरण्ये || (२)
तात्पर्य :-
हे माते ! कमल फूल जैसी कोमल, सौम्य, तथा सुन्दर और कमल पंखुड़ियों जैसी आँख पाकर विष्णु भगवान के ह्रदय में बसने वाली माता ! आप को नमन करता हूँ |
हे क्षीर सागर से जन्मी , तथा कमल के कोमल गर्भ में आसीन होने वाली गौरी माँ ! आप की शरण में माथा टेकता हूँ, हर वक्त दया करते रहें !
वन्दे पद्मकराम , प्रसन्न वदनाम, सौभाग्य दाम , भाग्यदाम ,
हस्ताभ्याम अभय प्रदाम , मणि गणेर नाना विधैर भूषिताम ,
भक्ताभीष्ट फल प्रदाम , हरिहर ब्रह्मादिभिः सेविताम ,
पार्श्वे पंकज , शंख , पद्म , निधिभिर युक्ताम , सदा शक्तिभिः ||
सरसिज नयने , सरोज़ हस्ते , धवळ तरामसुक गन्ध मालय शोभे ,
भगवति हरि वल्लभे ! मनोज्ञे ! त्रिभुवन भूत करि प्रसीद मह्यम || (३)
तात्पर्य :-
हे माँ ! पद्म जैसी हाथ पाकर प्रसन्न मुख रहने वाली , आपको नमन करता हूँ | हे सौभाग्य प्रदान तथा भाग्य प्रदान करने वाली माँ ! अपने हाथों से अभय प्रदान करें ! अनेक रंग-बिरंगे मणियों से अलंकृत होकर भक्तों के कामनाएं पूरी करते हुए , विष्णु, शिव, तथा ब्रह्मा आदि सब देवों से सेवा पाते हुए , अपने बग़ल में चक्र , शंख , पद्म , तथा संपत्ति धारण कर , सर्वदा शक्ति रूपिणी रक्षा करें |
हे कमल आँख वाली, कमल जैसी हाथों वाली, दूध जैसी सफ़ेद महकते हुए फूलों की मालाओं से सुशोभित माँ ! हे भगवती , विष्णु पत्नी ! भक्तों के मन की बातों को जानने वाली , तीनों लोक के प्राणियों की हमेशा रक्षा करते रहें !
मैं नित्य प्रतिदिन सुबह पूजा में "शुक्लाम्बरधरम। .. " के बाद २४ केशव नाम जाप करता हूँ | उसके बाद "शान्ताकारम भुजग शयनम। .. " स्तोत्र पढ़ कर तब लक्ष्मी स्तोत्र पारायण करता हूँ | फ़िर अन्य पूजा के पाठ करता हूँ |
लक्ष्मी पूजा अनुदिन करते रहने से धन, धान्य, आरोग्य , तथा परिवार में शान्ति कायम रहेगा |

Comments
Post a Comment